Thursday, 22 September, 2011

अपने और अपनी किताब के बारे में कुछ शब्द


मेरी किताब के बारे में अनेक अख़बारों और पत्रिकाओं में शब्द प्रकाशित हुए हैं, उनमें श्रेष्ठ प्रकाशन प्रथम प्रवक्ता का रहा है। प्रकाशन तो काफी पहले हो गया था लेकिन संकोच के कारण पोस्ट नहीं कर रहा था, खैर आप भी देखिये, जाने माने पत्रकार और शायर श्री दिनेश ठाकुर जी ने यह टिप्पणी लिखी है, उनका ह्रदय से आभार। वैसे तो मैं हमेशा ही बहुतों को उपकृत करने की स्थिति में रहा हूँ लेकिन ऐसा कभी किया नहीं, इस मामले में मैं बहुत काम का आदमी नहीं हूँ. ऐसा बहुत सारे लोग भी मानेंगे. न कभी किसी को अनुचित रूप से उपकृत किया और न कभी स्वयं अनुचित रूप से उपकृत हुआ। पत्रकारिता के प्रति गहरी ईमानदारी रही है, पत्रकारिता पर विश्वास भी गहरा रहा है इसलिए कभी अनुचित लाभ नहीं उठाया। इसका नुक्सान जरूर रहा है, लेकिन मैं अपना तरीका नहीं बदलूँगा मेरी किताब मेरी कथनी नहीं बल्कि करनी का प्रतिफल है। उन तमाम मित्रों का आभार जो निःस्वार्थ भाव से मेरे साथ रहे हैं। अग्रज दिनेश ठाकुर जी की जितनी प्रसंशा की जाए कम है, मुझे लगा था कि मेरे जैसे किसे ब्यक्ति की किताब पर मेरे जैसा ही एक अग्रज लिखे, तो ईमानदारी ज्यादा सुनिश्चित होगी और वह हुई, आज भी हम दोनों के बीच न तो फालतू की बटरिंगबाजी है और न कोई सेटिंग, ऐसा ही बहुत कुछ है मेरे पास, जो पोलिटिकली गलत है, बाकी फिर कभी....

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