झारखण्ड मे जो चुनाव नतीजे आये है, उनसे चिंता बढ़ गयी है। किसी भी पार्टी को अकेले बहुमार नहीं मिलना एक बड़ी चिंता की बात है। राजस्थान, मध्यप्रदेश, हरियाणा के साथ ही अगर झारखण्ड में चुनाव हुए होते तो बीजेपी को फायदा हो सकता था। लोकसभा चुनाव के समय बीजेपी बहुत मजबूत थी, लेकिन कांग्रेस ने झारखण्ड में तब वहां विधानसभा चुनाव नहीं करवाए। मधु कोड़ा का मुद्दा शांत हो गया , कांग्रेस के पाप को जब जनता भूल सी गयी तब वहां चुनाव करवाए। कांग्रेस को खास लाभ नहीं हुआ लेकिन बीजेपी हार जरूर गयी। कांग्रेस ने पूर्व भाजपाई बाबूलाल मरांडी से गठबंधन करके भी मधु कोड़ा से हुए नुक्सान की भरपाई कर ली।
न महंगाई मुद्दा रही न भ्रष्टाचार। तभी तो मधु कोड़ा की पत्नी चुनाव जीत गयी और सोरेन मुख्यमंत्री पद के लिए लालायित हैं। देश चिंता जनक दौर में है लोगों की मानसिकता समझ से परे जा रही है। ऐसा लगता हैं की भ्रष्टाचार कोई मुद्दा ही नहीं रहा। जिस समाज को भ्रष्टाचारियों को डंडे लेकर खदेड़ देना चाहिए वह सामाज विवादस्पद व भ्रष्ट नेताओं को बार-बार बचा ले रहा है। शायद झारखण्ड को फिर जोड़-तोड़ वाला एक भ्रष्ट मुख्मंत्री ही मिलेगा। बेशक यह दौर कांग्रेस का है, क्या वह उम्मीदों पर खरी उतरेगी ? क्या वह आम आदमी को वास्तविक रहत देने के प्रयास करेगी ? क्या अच्छी योजनाओं में भ्रष्टाचार कम होगा? क्या गरीबों का पैसा गरीबों तक पहुंचेगा ?
What is religion? / Part - 1
2 weeks ago
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