Friday, 13 March 2009
जम्हूरियत की किरकिरी
आतंकवादियों या कट्टरपंथियों से मुकाबले के लिए जिस तरह की छवि के नेता होने चाहिए, वैसे नेता पाकिस्तान में नहीं हैं। जब कोई दागदार नेता मुल्क का नेतृत्व करता है, तो जाहिर है, उससे देश को अंतत: घाटा होता है और गलत काम करने वाले लोगों का मनोबल बढ़ता है। आज पाकिस्तान में आतंकवादी खुद को मजबूत पा रहे हैं, तो वास्तव में यह जरदारी, गिलानी और कियानी जैसों की कमजोरी है। जरदारी ने नवाज शरीफ और उनके भाई शाहबाज शरीफ के साथ जो किया है, वह जम्हूरियत नहीं है। जम्हूरियत केवल सत्ता पक्ष की जिम्मेदारी नहीं है। यह विपक्ष की भी जिम्मेदारी है। जम्हूरियत हड़पने की चीज नहीं है, बांटने की चीज है, लेकिन जरदारी तो बेनजीर भुट्टो की मौत के बाद से ही हड़पने में जुटे हैं। अब भी वक्त है, पाकिस्तान में जम्हूरियत पसंद नेताओं को एकजुट होना होगा। वरना एक दूसरे को अयोग्य ठहराने की जद्दोजहद में मुल्क उन फौजियों के हाथों में चला जाएगा, जिन्होंने अब तक पाकिस्तान की फजीहत करवाने के अलावा और कुछ नहीं किया है।
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